मुंबई में हाल ही में रजुता दीवेकर की नई किताब के लॉन्च पर बॉलीवुड अभिनेत्री करीना कपूर ने सेल्फ-बिलीफ, बॉडी पॉजिटिविटी और संतुलित जीवनशैली बनाए रखने के बारे में अपनी बात रखी। अपनी बेबाकी और कॉन्फिडेंस के लिए जानी जाने वाली करीना ने आत्म-विश्वास के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “मैं अपने जीवन का नियम मानती हूं - मैं अपनी खुद की पसंदीदा हूं। यही तरीका है जिससे हर महिला को अपना जीवन जीना चाहिए।” उनके इस शक्तिशाली वक्तव्य ने कई लोगों को प्रेरित किया, यह दिखाते हुए कि असली आत्मविश्वास भीतर से आता है, बाहरी राय से नहीं।
करीना ने अपने खाने और शरीर के साथ एक अच्छे सम्बन्ध के बारे में भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा, “मैं हमेशा आत्मविश्वासी रही हूं। मेरे खाने के साथ रिश्ता हमेशा शानदार रहा है। मैंने कभी भी पतला दिखने के लिए भूखा रहने की कोशिश नहीं की। उनके इस बयान ने यह दर्शाया कि महिलाओं को समाज की अवास्तविक सुंदरता के मानकों के पीछे दौड़ने की जरूरत नहीं है। करीना की बेबाकी हमें याद दिलाती है कि आत्म-प्रेम और स्वीकृति ही असली खुशहाली की कुंजी हैं।
करीना ने अपने पोस्ट-प्रेगनेंसी बॉडी के बारे में भी बात की, स्वीकार करते हुए कि बेटे जेह के जन्म के बाद उन्होंने एक पल के लिए फिर से फिट होने के बारे में सोचा था। लेकिन उन्होंने जल्दी ही उस विचार को छोड़ दिया और कहा, “लेकिन यह सिर्फ एक पल के लिए था। मैं अभी भी कह रही थी, ‘मैं ठीक हूं। मैं शानदार लग रही हूं।’ मैंने 25 किलो वजन बढ़ा लिया था, लेकिन मुझे इसकी कोई परवाह नहीं थी।” उनका यह नजरिया दिखाता है कि स्वास्थ्य केवल वज़न घटाने के बारे में नहीं है, बल्कि मानसिक शांति और आत्म-संतुष्टि के बारे में भी है।
जब बात आती है फिट रहने की, तो करीना का तरीका बहुत ही सरल और प्रेरणादायक है। वह रोज़ाना टहली करती हैं और हफ्ते में दो बार योग करती हैं, न कि वजन कम करने के लिए बल्कि खुद को ऊर्जावान और ताजगी से भरपूर महसूस करने के लिए। उन्होंने कहा, “मैं वजन कम करने के लिए एक्सरसाइज नहीं करती। मैं इसलिए करती हूं क्योंकि मुझे सुबह उठकर इसका इंतजार रहता है। यह मेरे दिमाग को सक्रिय करता है और मुझे अच्छा महसूस कराता है।” करीना ने अपने कम्फर्ट फूड के बारे में भी बताया, खासकर खिचड़ी के बारे में, जिसे वह अगर कुछ दिनों तक नहीं खाती तो उसे उसकी तलब लग जाती है। करीना के ये विचार हमें याद दिलाते हैं कि खुशहाली और स्वास्थ्य परिपूर्णता में नहीं, बल्कि खुद को वैसे ही अपनाने में है जैसे हम हैं।