अयोध्या न्यूज डेस्क: राम मंदिर में चढ़ावे की रकम और सामान की कथित चोरी के मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपितों को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। रिमांड को लेकर आरोपितों की ओर से उठाई गई कानूनी आपत्तियों पर विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम ने फैसला सुनाते हुए उनकी दलीलें खारिज कर दीं। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि मंदिर ट्रस्ट के गणना कक्ष में चढ़ावे की रकम और सामान की गिनती, निगरानी या दानपात्रों की चाबियों से जुड़े काम करने वाले आरोपित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत लोक सेवक की श्रेणी में आते हैं।
अदालत के इस फैसले के बाद सभी आठ आरोपितों की रिमांड मंजूर हो गई, जो 5 सितंबर तक प्रभावी रहेगी। आरोपितों ने पुलिस पर गलत धाराएं लगाने और उन्हें जेल भेजने का आरोप लगाते हुए रिमांड का विरोध किया था। उन्होंने केस डायरी कोर्ट में तलब करने की मांग भी की थी। वहीं, विवेचक ने इसका विरोध करते हुए कहा कि मंदिर ट्रस्ट में काम करने वाले लोग सार्वजनिक जिम्मेदारी से जुड़े हैं और मामले में सुनियोजित व लगातार आपराधिक साजिश की गई है। विवेचक ने कोर्ट के सामने केस डायरी भी पेश की।
केस डायरी के मुताबिक अविनाश शुक्ल, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्र मंदिर ट्रस्ट के गणना कक्ष में तैनात थे। आरोप है कि इसी जिम्मेदारी का फायदा उठाकर गणना के दौरान चोरी और गबन किया गया। सीसीटीवी फुटेज में कुछ आरोपित नोटों की गड्डियां छिपाते हुए दिखाई देने की बात कही गई है। वहीं, सुभाषचंद्र श्रीवास्तव गणना प्रभारी थे और उनकी निगरानी में चढ़ावे की छंटनी होती थी। कोर्ट ने यह दलील भी खारिज कर दी कि लोक सेवक नहीं होने के कारण आरोपितों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और बीएनएस की संबंधित धाराओं में रिमांड नहीं हो सकता।
आरोपितों ने बीएनएस की धारा 317(4) के तहत भी रिमांड पर आपत्ति जताई थी, लेकिन कोर्ट ने कहा कि इस धारा में उनके खिलाफ रिमांड लिया ही नहीं गया था। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने इस चुनौती को वापस भी ले लिया। अदालत ने अधिकांश आरोपितों के खिलाफ चोरी, गबन, आपराधिक साजिश समेत बीएनएस की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं में रिमांड मंजूर किया। वहीं, बीएनएस की धारा 3(5) के तहत अलग से रिमांड को जरूरी नहीं माना गया, क्योंकि सभी आरोपितों के खिलाफ पहले ही आपराधिक साजिश की धारा 61(2) लगाई गई है।