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राम मंदिर के पहले CEO की रेस में 3 नाम, पूर्व IPS राजेश पांडेय से लेकर रिटायर्ड IAS योगेश्वर मिश्रा तक

Photo Source : Google

Posted On:Wednesday, September 2, 2026

अयोध्या न्यूज डेस्क: अयोध्या के राम मंदिर प्रशासन के लिए पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO के चयन पर बुधवार को फैसला हो सकता है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इस पद के लिए तीन नामों को अंतिम दौड़ में रखा है। इनमें उत्तर प्रदेश कैडर के पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडेय, रिटायर्ड IAS अधिकारी योगेश्वर राम मिश्रा और बिहार के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी परेश सक्सेना का नाम शामिल है। CEO की जिम्मेदारी राम मंदिर के रोजाना प्रशासनिक कामकाज के साथ-साथ पुलिस, जिला प्रशासन और दूसरी सरकारी एजेंसियों के साथ तालमेल की होगी।

राजेश पांडेय उत्तर प्रदेश पुलिस में लंबे समय तक अहम पदों पर रहे हैं। वह लखनऊ, अलीगढ़, मेरठ और सहारनपुर के SSP रह चुके हैं और STF व ATS से भी जुड़े रहे। उनके करियर में आतंकवाद से जुड़े कई बड़े मामलों की जांच और ऑपरेशन शामिल रहे हैं। 2005 में राम जन्मभूमि परिसर पर हुए आतंकी हमले और 2006 के वाराणसी सीरियल ब्लास्ट की जांच से भी उनका नाम जुड़ा रहा है। 2021 में पुलिस सेवा से रिटायर होने के बाद उन्होंने UPEIDA में सुरक्षा सलाहकार के तौर पर काम किया।

दूसरे दावेदार योगेश्वर राम मिश्रा रिटायर्ड IAS अधिकारी हैं और अयोध्या के जिलाधिकारी रह चुके हैं। ऐसे में उन्हें शहर की प्रशासनिक व्यवस्था, धार्मिक आयोजनों और बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं से जुड़ी चुनौतियों का सीधा अनुभव है। उनका जुड़ाव काशी विश्वनाथ कॉरिडोर जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और धार्मिक पर्यटन प्रोजेक्ट्स से भी रहा है। वहीं, तीसरे नाम परेश सक्सेना का है, जो बिहार के पूर्व DGP बताए जा रहे हैं। इंटरव्यू के दौरान मंदिर प्रबंधन, सुरक्षा और बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ संभालने जैसे मुद्दों पर उम्मीदवारों की क्षमता परखी गई।

राम मंदिर के लिए पहले CEO की नियुक्ति ऐसे समय हो रही है, जब अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। मंदिर प्रशासन के सामने भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा, स्टाफ, सुविधाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर, दान और वित्तीय व्यवस्था जैसे कई बड़े काम हैं। दान को लेकर उठे विवादों के बाद पारदर्शिता और मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था की जरूरत भी बढ़ गई है। ऐसे में नए CEO की भूमिका सिर्फ मंदिर के रोजाना कामकाज तक सीमित नहीं होगी, बल्कि उन्हें एक ऐसी व्यवस्था तैयार करनी होगी जो बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, सुरक्षा व्यवस्था, दान और सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रख सके।


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