अयोध्या न्यूज डेस्क: मैदानी क्षेत्रों के किसानों के लिए अब सेब की खेती भी लाभकारी विकल्प बनती जा रही है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार अन्ना जैसी उन्नत किस्में अधिक तापमान वाले इलाकों में भी सफलतापूर्वक उगाई जा सकती हैं। ये प्रजातियां 44 डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी सहन करने में सक्षम हैं और रोपण के लगभग तीन साल बाद फल देना शुरू कर देती हैं। ड्रिप सिंचाई, कम पानी की जरूरत और इंटरक्रॉपिंग तकनीकों के कारण इसकी खेती कम लागत में बेहतर मुनाफा देने वाली साबित हो सकती है।
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज के वैज्ञानिकों ने पूर्वांचल के मैदानी इलाकों में सेब उत्पादन को लेकर महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। अब तक सेब की खेती मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे ठंडे राज्यों तक सीमित मानी जाती थी, जहां लंबे समय तक ठंड का प्रभाव बना रहता है। लेकिन नई कृषि तकनीकों और वैज्ञानिक अनुसंधान के जरिए अब गर्म क्षेत्रों में भी इसकी संभावनाएं बढ़ रही हैं।
विश्वविद्यालय के उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय में सेब की कई उन्नत प्रजातियों पर प्रयोग किए जा रहे हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. भानु प्रताप के नेतृत्व में डॉ. निरंजन सिंह इस शोध को आगे बढ़ा रहे हैं। वैज्ञानिकों ने वर्ष 2023 में हिमाचल प्रदेश से अन्ना, हरिमन-99 और डोरसेट गोल्डन जैसी प्रजातियों के करीब 150 पौधे मंगाकर लगाए थे। अब इन पौधों में फल और फूल आने शुरू हो गए हैं, जिससे शोध को नई सफलता मिली है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि अगले दो वर्षों में पूर्वांचल के किसानों के लिए सेब उत्पादन की उपयुक्त तकनीक पूरी तरह विकसित कर ली जाएगी। इससे किसान पारंपरिक खेती के साथ सेब की बागवानी कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार यह पहल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ खेती में विविधता बढ़ाने की दिशा में भी अहम कदम साबित हो सकती है।