अयोध्या न्यूज डेस्क: अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रस्तावित मस्जिद परियोजना अब अपने मूल स्वरूप से काफी छोटी हो गई है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि मुस्लिम समुदाय की ओर से अपेक्षित समर्थन और आर्थिक सहयोग नहीं मिलने के कारण योजना को बड़े स्तर पर घटाना पड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को मुस्लिम पक्ष को मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन आवंटित करने का निर्देश दिया था। इसके बाद मस्जिद परिसर के निर्माण के लिए इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन (IICF) का गठन किया गया था। शुरुआत में यहां मस्जिद के साथ 300 बेड का मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल और एक पुस्तकालय बनाने की योजना थी।
आईआईसीएफ के अध्यक्ष जफर अहमद फारूकी ने कहा कि समुदाय की ओर से इस परियोजना में रुचि कम रही और प्राप्त दान अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने बताया कि अब पहले की तुलना में काफी छोटी मस्जिद बनाने की योजना बनाई जा रही है। फाउंडेशन के सचिव अथर हुसैन के अनुसार, नई योजना के लिए करीब 3 से 5 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी, जबकि अब तक केवल 1.5 करोड़ रुपये का ही दान प्राप्त हुआ है।
इस बीच, राम मंदिर का निर्माण पूरा हो चुका है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 के आम चुनाव से पहले मंदिर का उद्घाटन किया था। वहीं, राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की कथित चोरी के आरोपों को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है, जिसने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।