अयोध्या न्यूज डेस्क: आरोपों का सामना कर रहे यादव ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने वर्ष 2008 में एक पंजीकृत बिक्री विलेख के जरिए जमीन खरीदी थी। उनके अनुसार, वर्ष 2015-16 के बीच उस भूमि पर भवन का निर्माण कराया गया। यादव का दावा है कि मंदिर निर्माण कार्य से जुड़ी इंजीनियरिंग कंपनियों को उन्होंने यह भवन किराए पर दिया था, जिससे उन्हें आय प्राप्त हुई।
हालांकि, मामले की जांच कर रहे अधिकारी मिश्रा ने यादव को किसी भी तरह की क्लीन चिट देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यादव उन "विश्वसनीय लोगों" की सूची में शामिल हैं, जिनसे विशेष जांच दल (SIT) विस्तार से पूछताछ करेगा। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि उन्हें जो भरोसा और जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं, उनका कहीं दुरुपयोग तो नहीं हुआ।
मिश्रा ने यह भी स्वीकार किया कि ट्रस्ट के गठन के समय यादव को कुछ महत्वपूर्ण और संवेदनशील जिम्मेदारियां दी गई थीं। हालांकि, इस स्तर पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि उन्होंने विश्वास का दुरुपयोग किया या नहीं। SIT सभी तथ्यों और दस्तावेजों की जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचेगी।
उधर, मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के अयोध्या दौरे पर प्रतिक्रिया देते हुए समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि SIT की संरचना को लेकर पहले से ही संदेह बना हुआ है और जांच को प्रभावित करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। अखिलेश यादव ने कहा कि जनता केवल धनराशि ही नहीं, बल्कि सोना-चांदी, बहुमूल्य धातुओं, आभूषणों और अन्य चढ़ावे का भी पूरा हिसाब मांग रही है। वहीं, SIT को 13 जून को गठित किया गया था और उसे 15 दिनों के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपनी है।