अयोध्या न्यूज डेस्क: अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से दिए गए दान की कथित हेराफेरी के मामले में सोमवार को विशेष अदालत ने तीन आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। एंटी करप्शन कोर्ट के विशेष न्यायाधीश रजत वर्मा ने अविनाश शुक्ला, मनीष कुमार यादव और राम शंकर मिश्रा की जमानत अर्जियों पर सुनवाई की। आरोपियों के वकील कुल शेखर सिंह ने बताया कि अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जमानत देने से इनकार कर दिया।
बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि मामले में सरकारी कर्मचारी द्वारा भ्रष्टाचार और आपराधिक विश्वासघात से जुड़ी जो धाराएं लगाई गई हैं, वे आरोपियों पर लागू नहीं होतीं, क्योंकि वे सरकारी कर्मचारी नहीं हैं। वकील के मुताबिक, अगर इन धाराओं को हटा दिया जाए तो बाकी धाराओं में अधिकतम सात साल तक की सजा का प्रावधान है और ऐसी स्थिति में आरोपियों को जमानत मिल सकती है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि पुलिस ने अभी तक मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं की है।
यह मामला राम मंदिर में श्रद्धालुओं से मिले नकद चढ़ावे और अन्य कीमती सामान की कथित हेराफेरी से जुड़ा है। 25 जून को एफआईआर दर्ज होने के बाद आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई राज्य सरकार की ओर से गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद हुई थी। शुक्रवार को अदालत ने सभी आठ आरोपियों की न्यायिक हिरासत 21 सितंबर तक बढ़ाई थी। अभियोजन के मुताबिक, जांच के दौरान अब तक 79.85 लाख रुपये की रकम बरामद की जा चुकी है।
आठ आरोपियों में ज्यादातर बैंक कर्मचारी हैं, जिन्हें राम मंदिर में चढ़ावे की रकम गिनने की जिम्मेदारी दी गई थी। सुभाष श्रीवास्तव चढ़ावा गिनने की प्रक्रिया की निगरानी करते थे, जबकि रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव ड्राइवर और पूर्व श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी सहयोगी के तौर पर काम करते थे। मामले में अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, करुणेश पांडेय, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव भी आरोपी हैं। वकील के मुताबिक, तीन अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर 22 सितंबर और बाकी दो की अर्जियों पर 23 सितंबर को सुनवाई होगी।