अयोध्या न्यूज डेस्क: अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया का कई प्रमुख संतों ने विरोध किया है। उनका कहना है कि भगवान राम के मंदिर का संचालन किसी प्रशासनिक अधिकारी के बजाय धार्मिक परंपराओं को समझने वाले संत या रामानंदी संप्रदाय के व्यक्ति को करना चाहिए। हाल ही में ट्रस्ट ने मंदिर के प्रशासन और वित्तीय प्रबंधन के लिए CEO पद पर आवेदन मांगे हैं।
जगद्गुरु सतीशाचार्य ने कहा कि मंदिर को किसी CEO की नहीं, बल्कि भगवान राम के सेवक की जरूरत है। उनका कहना है कि मंदिर का संचालन ऐसे संत के हाथों में होना चाहिए, जो धर्म और परंपराओं की गहरी समझ रखता हो। महंत धर्म दास ने भी कहा कि जहां भगवान राम विराजमान हैं, वहां CEO की आवश्यकता नहीं है।
करपात्रीजी महाराज ने भी मंदिर के लिए "प्रधान राम सेवक" नियुक्त करने की बात कही। वहीं महंत राजू दास ने कहा कि अगर मंदिर के प्रबंधन में अखाड़ों के संत शामिल होते तो कथित दान गड़बड़ी जैसी स्थिति नहीं बनती। उन्होंने दान गबन मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की।
राम मंदिर ट्रस्ट ने CEO के चयन के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई है, जिसमें सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णु कांत चतुर्वेदी और लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सुरेश हवारे शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इस पद के लिए अब तक एक हजार से अधिक आवेदन आ चुके हैं। यह प्रक्रिया ऐसे समय में चल रही है, जब मंदिर में कथित दान गबन मामले को लेकर ट्रस्ट और सरकार विपक्ष के निशाने पर हैं।