अयोध्या न्यूज डेस्क: अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के चंदे के कथित दुरुपयोग के आरोपों के बीच ट्रस्ट के महासचिव पद से हटे चंपत राय ने खुला पत्र लिखकर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि ट्रस्ट के हर बड़े फैसले कमेटी की मंजूरी के बाद ही लिए गए थे।
चंपत राय ने कहा कि कमेटी की अध्यक्षता नृपेंद्र मिश्रा करते थे और नियमित बैठकों में मंदिर से जुड़े काम, योजनाओं और खर्च को मंजूरी दी जाती थी। उन्होंने अपने पत्र में ट्रस्ट के कामकाज और लिए गए फैसलों को लेकर सफाई दी।
SIT रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट
हाल ही में सामने आई SIT की अंतिम रिपोर्ट में ट्रस्ट के वित्तीय कामकाज में कुछ कमियां जरूर बताई गई हैं, लेकिन चंपत राय और ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा पर पैसे चोरी करने के आरोप साबित नहीं हुए। रिपोर्ट में दोनों को फंड की चोरी के आरोपों से क्लीन चिट दी गई है।
वहीं, SIT की अंतरिम रिपोर्ट में मंदिर के चंदे की रकम के कथित गबन का आरोप लगाया गया था। इसके बाद 26 जून को ट्रस्ट के आठ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया था। रिपोर्ट में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन में पेशेवर व्यवस्था की कमी पर भी सवाल उठाए गए थे।
इस बीच नृपेंद्र मिश्रा ने रिपोर्ट को लेकर कहा, “जब तक मैं पत्र नहीं देख लेता, तब तक मैं सिर्फ इतना कहूंगा कि यह आपकी (मीडिया की) बनाई हुई कहानी है... यह सिर्फ मनगढ़ंत कहानी है।”