अयोध्या न्यूज डेस्क: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (SRJBTK) को लेकर केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने स्पष्ट किया है कि यह ट्रस्ट न तो केंद्र सरकार और न ही उत्तर प्रदेश सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण या वित्तीय सहायता के अधीन है। आयोग ने कहा कि ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है, जिसका संचालन उसके स्थायी ट्रस्टी स्वयं करते हैं। इसलिए इसे सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत 'सार्वजनिक प्राधिकरण' नहीं माना जा सकता।
यह मामला तब सामने आया जब आरटीआई कार्यकर्ता नीरज शर्मा ने वर्ष 2024 की शुरुआत में गृह मंत्रालय से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के जन सूचना अधिकारियों (PIO) की जानकारी मांगी थी। गृह मंत्रालय ने यह जानकारी देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया। अदालत के निर्देश पर केंद्रीय सूचना आयोग ने गृह मंत्रालय से जवाब मांगकर ट्रस्ट की कानूनी स्थिति की समीक्षा की।
गृह मंत्रालय ने आयोग को बताया कि ट्रस्ट का गठन सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुरूप किया गया है और इसके सभी निर्णय आंतरिक रूप से लिए जाते हैं। ट्रस्ट को सरकार से न तो वित्तीय सहायता मिलती है और न ही उसके कामकाज पर किसी प्रकार का सरकारी प्रशासनिक नियंत्रण है। इसी आधार पर केंद्रीय सूचना आयोग ने अपने अंतिम आदेश में कहा कि ट्रस्ट आरटीआई कानून के दायरे में नहीं आता।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब 6 जुलाई को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक होने वाली है। इस बैठक में दान चोरी विवाद के बीच नैतिक आधार पर अपने पद छोड़ चुके महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के भविष्य पर फैसला लिया जा सकता है, जिससे इस निर्णय का महत्व और बढ़ गया है।