अयोध्या न्यूज डेस्क: करीब ढाई महीने के अंतराल के बाद गुरुवार को राम मंदिर के पूर्व व्यवस्थापक गोपाल राव एक बार फिर अयोध्या में नजर आए। सुबह ही वह रामजन्मभूमि परिसर पहुंचे और उडुप्पी के पेजावर मठ के पीठाधीश्वर व श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ के साथ लिंगायत समाज के पूजन कार्यक्रम में शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने कर्नाटक और दक्षिण भारत के दूसरे इलाकों से आए साधु-संतों के साथ रामलला के दर्शन किए। इस दौरान वह मंदिर में काम करने वाले सेवादारों और कर्मचारियों का हालचाल भी लेते दिखे।
जून में मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आने के बाद गोपाल राव एसआईटी की जांच के दौरान रामजन्मभूमि परिसर में मौजूद रहे थे और उन्होंने जांच में सहयोग भी किया था। 23 जून को शेषावतार मंदिर के ध्वजारोहण कार्यक्रम में भी वह ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्र के साथ शामिल हुए थे। हालांकि, 6 जुलाई को ट्रस्ट की बैठक में उन्हें विशेष आमंत्रित सदस्यों की सूची से हटा दिया गया। इसके बाद वह कभी दिल्ली, कभी कर्नाटक तो कभी अयोध्या में रहने लगे।
27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चढ़ावा चोरी मामले की जांच के लिए दूसरी एसआईटी गठित की गई थी। इसी दौरान दिल्ली में विश्व हिंदू परिषद की केंद्रीय प्रबंध समिति की बैठक में गोपाल राव को वनवासी रक्षा परिवार का पालक अधिकारी नियुक्त किया गया। इसके साथ ही उनका कार्यक्षेत्र अयोध्या से बदलकर दिल्ली कर दिया गया। इससे पहले वह केंद्रीय मंत्री प्रशिक्षण प्रमुख, नैतिक शिक्षा प्रमुख और कर्णावती यानी अहमदाबाद क्षेत्र के पालक अधिकारी की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे।
नई जिम्मेदारी मिलने के बाद गोपाल राव करीब एक सप्ताह तक अयोध्या में रहे, लेकिन फिर रामनगरी से चले गए। 23 सितंबर को चढ़ावा चोरी मामले में दाखिल चार्जशीट में पुलिस ने पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के साथ गोपाल राव को भी गवाह बनाया है। जुलाई के आखिरी सप्ताह के बाद गुरुवार को वह पहली बार फिर अयोध्या में दिखाई दिए और राम मंदिर पहुंचकर रामलला के दर्शन-पूजन किए।