अयोध्या न्यूज डेस्क: रामनगरी अयोध्या में महात्मा गांधी से जुड़ी कई ऐसी यादें हैं, जो आज भी उनके यहां आने की कहानी बताती हैं। गांधीजी के विचारों में राम, रामराज्य, सत्य और अहिंसा की खास जगह थी और अयोध्या में भी उनके इन विचारों की झलक देखने को मिलती है। आज भले ही अयोध्या धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के तौर पर पहचान बना रही है, लेकिन एक समय यह शहर स्वतंत्रता आंदोलन की गतिविधियों का भी हिस्सा रहा था।
गांधीजी 20 फरवरी 1921 को पहली बार अयोध्या पहुंचे थे। उस समय असहयोग आंदोलन के दौरान वह देशभर का दौरा कर रहे थे। अयोध्या में उन्होंने जालपा देवी मंदिर के पास मैदान में एक सभा को संबोधित किया और लोगों से स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ने की अपील की। सभा के बाद उन्होंने फैजाबाद की धारा रोड पर स्थित बाबू शिवप्रसाद की कोठी में रात बिताई।
अगली सुबह गांधीजी सरयू नदी पहुंचे और वहां स्नान किया। इसके करीब आठ साल बाद, 1929 में उन्होंने दोबारा अयोध्या का दौरा किया। इस तरह रामनगरी से उनका जुड़ाव सिर्फ राजनीतिक गतिविधियों तक नहीं रहा, बल्कि सरयू और अयोध्या की धार्मिक पहचान से भी उनकी यादें जुड़ गईं। उनके दोनों दौरों की घटनाएं आज भी शहर के इतिहास में दर्ज हैं।
गांधीजी के निधन के बाद अयोध्या से उनका रिश्ता और भी खास हो गया। देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद समेत कांग्रेस के कई नेता उनकी अस्थियां लेकर रामनगरी पहुंचे थे। इसके बाद उनकी अस्थियों का सरयू में विसर्जन किया गया। आज अयोध्या में गांधीजी से जुड़ी ये स्मृतियां उस दौर की याद दिलाती हैं, जब रामनगरी आस्था के साथ-साथ देश की आजादी की लड़ाई की भी गवाह थी।