अयोध्या न्यूज डेस्क: अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि में कथित गड़बड़ी के आरोपों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) ने सोमवार से अपनी पड़ताल शुरू कर दी है। जांच के दूसरे दिन भी टीम ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कर्मचारियों, दान राशि की गिनती करने वाले कर्मियों और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया से जुड़े लोगों से पूछताछ की। SIT का मुख्य फोकस दानपात्र खोलने से लेकर नकदी गिनने और बैंक में जमा कराने तक की पूरी प्रक्रिया की जांच पर रहा।
सूत्रों के अनुसार, SIT ने मंदिर परिसर में मौजूद करीब 40 दानपात्रों का निरीक्षण किया और यह जानने की कोशिश की कि क्या इनमें से सीधे नकदी निकाली जा सकती है। जांच में ऐसा होना मुश्किल पाया गया। हर दिन मंदिर बंद होने के बाद एक निर्धारित कक्ष में दानपात्र खोले जाते हैं। नकदी की गिनती का जिम्मा भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को दिया गया है, जिसने इसके लिए वाराणसी की एक निजी एजेंसी को नियुक्त किया हुआ है।
जांच में सामने आया कि पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी निगरानी में होती है और करीब 50 कर्मचारी इसमें शामिल रहते हैं। निजी एजेंसी के कर्मचारी नोटों की गड्डियां तैयार करते हैं, जिनकी निगरानी ट्रस्ट के कर्मचारी करते हैं। इसके बाद SBI और तकनीकी व्यवस्था संभाल रही TCS के कर्मचारी राशि का सत्यापन कर उसे बैंक में जमा कराते हैं। SIT ने कर्मचारियों के आने-जाने का रिकॉर्ड, सुरक्षा जांच, दान से जुड़े दस्तावेज और सीसीटीवी सिस्टम की भी बारीकी से जांच की।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने राम मंदिर में चढ़ावे की करोड़ों रुपये की राशि गायब होने के आरोपों का हवाला दिया। हालांकि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। वहीं, पुलिस ने दान गिनती से जुड़े एक कर्मचारी लवकुश मिश्रा को हिरासत में लिया है, जिसके घर से करीब 10 लाख रुपये नकद बरामद हुए हैं। हालांकि पुलिस ने अभी तक इस रकम को दान राशि से जोड़कर नहीं देखा है। SIT को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है।