अयोध्या न्यूज डेस्क: अयोध्या में राम मंदिर दान चोरी मामले की जांच अभी जारी है, लेकिन इस विवाद का असर अब श्रद्धालुओं की सोच और स्थानीय कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। कई श्रद्धालुओं का कहना है कि उनकी आस्था भगवान राम में पहले जैसी ही है, लेकिन मंदिर ट्रस्ट को लेकर भरोसा कमजोर हुआ है। इसी वजह से अब वे मंदिर में बड़ी राशि दान करने के बजाय जरूरतमंद लोगों की मदद करना बेहतर मान रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के रायपुर से दर्शन के लिए आईं 54 वर्षीय लक्ष्मी ठाकुर ने कहा कि पहले हर धार्मिक यात्रा में मंदिर में दान करना उनकी परंपरा का हिस्सा था, लेकिन अब वह किसी गरीब की मदद करना ज्यादा उचित समझती हैं। उनकी बेटी प्रियंका ने भी कहा कि दान चोरी का मामला सोशल मीडिया के जरिए दूसरे राज्यों तक पहुंच चुका है और लोग मंदिर में ज्यादा दान न करने की सलाह दे रहे हैं।
हरियाणा के हिसार से आए संदीप सैनी ने बताया कि वर्ष 2024 में उन्होंने मंदिर में 5,100 रुपये दान किए थे, लेकिन इस बार सिर्फ 51 रुपये ही चढ़ाएंगे। उनका कहना है कि भगवान राम पर पूरा विश्वास है, लेकिन ट्रस्ट पर भरोसा कम हुआ है। हालांकि, सभी श्रद्धालु ऐसा नहीं सोचते। गाजियाबाद से आए अमित शर्मा का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना ठीक नहीं है और उन्होंने पहले की तरह इस बार भी 1,100 रुपये दान करने का फैसला किया है।
राम मंदिर परिसर में रोजाना 40 दान पेटियों से नकदी और अन्य चढ़ावे एकत्र किए जाते हैं। सामान्य दिनों में करीब 75 लाख रुपये तक दान मिलता है, जबकि त्योहारों के दौरान यह राशि कई गुना बढ़ जाती है। ट्रस्ट के अनुसार वर्ष 2024-25 में करीब 153 करोड़ रुपये के चढ़ावे मिले थे। हालांकि दान चोरी विवाद सामने आने के बाद पिछले डेढ़ महीने के दान के आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
दान विवाद का असर अयोध्या के बाजारों पर भी पड़ने का दावा स्थानीय व्यापारियों ने किया है। हरिश्चंद्र मार्केट के पूजा सामग्री विक्रेता बलराम गुप्ता का कहना है कि पहले जहां रोजाना 10 से 12 हजार रुपये तक की बिक्री होती थी, अब कई दिन 2 हजार रुपये का कारोबार भी मुश्किल हो गया है। उनके मुताबिक दान विवाद और मंदिर तक जाने वाले एक पुराने रास्ते के बंद होने से ग्राहकों की संख्या घटी है।
पीतल के सामान के दुकानदार आशीष कुमार का कहना है कि अब पर्यटक मंदिर के समय या दर्शन की जानकारी कम और दान चोरी के मामले के बारे में ज्यादा पूछते हैं। वहीं रिकाबगंज बाजार के कपड़ा व्यापारी राजेश कुमार के अनुसार पिछले कुछ समय में बाहर से आने वाले ग्राहकों की संख्या काफी कम हुई है, जिससे कारोबार प्रभावित हुआ है।
होटल कारोबार पर भी असर देखने को मिल रहा है। मंदिर के पास स्थित एक गेस्ट हाउस के संचालक हरिओम वर्मा का दावा है कि पिछले एक महीने में उनके यहां कमरों की बुकिंग करीब 80 प्रतिशत तक घट गई है। वहीं ओम रेजीडेंसी के संचालक दीपक सोनी ने भी बुकिंग में 70 प्रतिशत से अधिक गिरावट की बात कही। हालांकि कुछ होटल संचालकों का मानना है कि मानसून के दौरान हर साल यात्रियों की संख्या कम होती है और पूरे असर को केवल दान विवाद से जोड़ना सही नहीं होगा।
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अब तक यह नहीं बताया है कि विवाद के बाद दान या श्रद्धालुओं की संख्या में कितनी कमी आई है। ट्रस्ट से जुड़े एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सप्ताहांत में भीड़ पहले जैसी रहती है, लेकिन सामान्य दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या कुछ कम हुई है और लोग अब महंगे आभूषण या बड़ी राशि दान करने से बच रहे हैं।
लखनऊ के अर्थशास्त्री डॉ. ए.पी. तिवारी का मानना है कि यदि धार्मिक पर्यटन प्रभावित होता है तो उसका सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। वहीं विश्व हिंदू परिषद से जुड़े प्रकाश शर्मा ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं की संख्या में कमी का मुख्य कारण मानसून का मौसम है और इसे दान विवाद से जोड़ना उचित नहीं है।