अयोध्या न्यूज डेस्क: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की कथित चोरी मामले में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट में अविनाश शुक्ला को मुख्य आरोपी माना गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 40 दिनों के दौरान दान गिनती कक्ष में लगभग 70 बार कथित चोरी और हेराफेरी की घटनाएं सामने आई हैं। इस अंतरिम रिपोर्ट पर सोमवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में चर्चा की गई।
एसआईटी की नौ पन्नों की रिपोर्ट में कहा गया है कि श्रद्धालुओं के नकद चढ़ावे की गिनती के लिए नियुक्त अविनाश शुक्ला के खिलाफ सबसे मजबूत साक्ष्य मिले हैं। जांच में सीसीटीवी फुटेज में उसे कई बार दान की नकदी और नोटों की गड्डियां निकालकर छिपाते हुए देखा गया। रिपोर्ट के अनुसार, इसी आधार पर जांचकर्ताओं ने पांच अन्य आरोपियों की पहचान की और कथित चोरी के पूरे तरीके को समझा।
रिपोर्ट में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय पर अविनाश शुक्ला की मदद करने, जबकि मनीष कुमार यादव पर दान गिनती कक्ष के भीतर समन्वय करने का आरोप लगाया गया है। वहीं, अलग सीसीटीवी फुटेज में रामाशंकर मिश्रा को भी नकदी की गड्डियां संभालते और छिपाते हुए देखा गया। एसआईटी ने फिलहाल छह आरोपियों की प्रथम दृष्टया संलिप्तता स्थापित होने की बात कही है।
जांच के दौरान पुलिस ने अविनाश शुक्ला के पास से 20.39 लाख रुपये नकद, 1,121 अमेरिकी डॉलर, सोने-चांदी के आभूषण, अन्य कीमती सामान और एक एसयूवी बरामद की है। पुलिस के अनुसार, अब तक इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और आरोपियों से 79 लाख रुपये से अधिक की बरामदगी हो चुकी है। एसआईटी ने मंदिर के दान प्रबंधन तंत्र में सुरक्षा और निगरानी संबंधी गंभीर खामियों की ओर भी इशारा किया है तथा ट्रस्ट के पिछले पांच वर्षों के खातों का दोबारा ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं।