अयोध्या न्यूज डेस्क: राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले के बाद श्रद्धालुओं और दानदाताओं के बीच उठे सवालों को देखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अयोध्या में अहम मंथन किया। शुक्रवार को संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों की चार घंटे से अधिक समय तक चली बैठक में भरोसा बहाल करने और भविष्य की रणनीति पर चर्चा की गई।
यह बैठक देवकाली स्थित आरएसएस कार्यालय 'साकेत निलयम' में हुई। बैठक की अध्यक्षता संघ के अखिल भारतीय सह-प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर ने की। इसमें प्रचार विभाग से जुड़े कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। हालांकि संघ की ओर से बैठक के एजेंडे की आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई, लेकिन सूत्रों के अनुसार चर्चा का मुख्य विषय दान चोरी विवाद के बाद बने हालात और संगठन की आगे की रणनीति रहा।
सूत्रों के मुताबिक बैठक में राम मंदिर के लिए एक पब्लिक रिलेशंस ऑफिसर (PRO) या आधिकारिक प्रवक्ता नियुक्त करने पर सहमति बनी। माना जा रहा है कि अगले एक महीने के भीतर इस पद के लिए उपयुक्त व्यक्ति का चयन किया जा सकता है, ताकि भविष्य में किसी भी विवाद पर ट्रस्ट और संबंधित संगठनों का पक्ष प्रभावी ढंग से सामने रखा जा सके।
यह बैठक एक दिन पहले आयोजित संत समाज सम्मेलन के बाद हुई, जिसमें आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के पदाधिकारियों ने अयोध्या के करीब 200 संतों से चर्चा की थी। उस बैठक में कई संतों ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में स्थानीय संतों और धार्मिक नेताओं को अधिक प्रतिनिधित्व देने की मांग उठाई थी।
बताया जा रहा है कि शुक्रवार की बैठक में इस सुझाव पर भी विचार किया गया। साथ ही यह महसूस किया गया कि दान चोरी विवाद के दौरान संगठनों की ओर से कोई अधिकृत प्रवक्ता सामने नहीं आने से उनका पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रखा जा सका। इसी वजह से भविष्य में संचार व्यवस्था को मजबूत करने और कम्युनिकेशन सिस्टम बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में अवध प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. अशोक दुबे, अयोध्या विभाग के सह-प्रचार प्रमुख डॉ. शैलेंद्र और अयोध्या प्रचार प्रमुख अमित शंकर समेत कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।