अयोध्या न्यूज डेस्क: अयोध्या में निर्मित दिव्य और भव्य राम मंदिर के निर्माण में इस्तेमाल किए गए औजारों को भी अब संरक्षित किया जाएगा। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने निर्णय लिया है कि मंदिर निर्माण में उपयोग हुई इन वस्तुओं को भविष्य में रामजन्मभूमि मंदिर निर्माण कार्यशाला में प्रदर्शित किया जाएगा। ट्रस्ट का मानना है कि मंदिर निर्माण में जितना योगदान कारीगरों और शिल्पियों का रहा, उतनी ही अहम भूमिका उन औजारों की भी रही, जिन्होंने इस ऐतिहासिक कार्य को संभव बनाया।
राम मंदिर निर्माण का मार्ग भले ही सुप्रीम कोर्ट के 9 नवंबर 2019 के फैसले के बाद साफ हुआ हो, लेकिन इसकी तैयारी कई दशक पहले शुरू हो चुकी थी। विश्व हिंदू परिषद ने वर्ष 1990 में ही अयोध्या के रामघाट चौराहे पर निर्माण कार्यशाला स्थापित कर पत्थरों की तराशी का काम शुरू करा दिया था। प्रसिद्ध वास्तुकार चंद्रकांत भाई सोमपुरा द्वारा तैयार मंदिर के नक्शे के आधार पर देशभर से आए कारीगर वर्षों तक यहां शिलाओं की नक्काशी करते रहे।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जनवरी 2021 से मंदिर निर्माण के लिए नींव का कार्य तेज हुआ। बढ़ती जरूरतों को देखते हुए राजस्थान में भी पत्थरों की तराशी के लिए कार्यशालाएं स्थापित की गईं। वहां तैयार किए गए गुलाबी पत्थरों के साथ अयोध्या की कार्यशाला में पहले से तैयार शिलाखंडों का भी मंदिर निर्माण में उपयोग किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में पारंपरिक औजारों के साथ आधुनिक मशीनों का भी बड़े स्तर पर इस्तेमाल हुआ।
ट्रस्ट अब मंदिर निर्माण से जुड़े सभी दस्तावेजों, साक्ष्यों और उपकरणों को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने की तैयारी कर रहा है। छेनी, हथौड़ी, मुंगरी, घुमावदार आरी, स्टोन कटर मशीन और ग्राइंडर पॉलिशर जैसे औजारों को संरक्षित कर भविष्य में रामकथा संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाएगा। वर्ष 1990 में लगभग 40 लाख रुपये की लागत से खरीदी गई विशेष कटर मशीन को भी सहेजा जाएगा, जिससे करीब एक लाख घनफीट पत्थरों की कटाई की गई थी। ट्रस्ट का उद्देश्य है कि रामनगरी आने वाले श्रद्धालु मंदिर निर्माण की इस ऐतिहासिक यात्रा और उससे जुड़े उपकरणों को भी करीब से जान सकें।