अयोध्या न्यूज डेस्क: उद्धव ठाकरे ने रविवार को मुंबई के दादर स्थित हनुमान मंदिर से 'राम रक्षा आंदोलन' की शुरुआत करते हुए अयोध्या राम मंदिर में कथित दान अनियमितताओं के मुद्दे पर भाजपा पर अप्रत्यक्ष निशाना साधा। 2019 में भाजपा से अलग होने के बाद पहली बार उद्धव ठाकरे ने अपने राजनीतिक अभियान के केंद्र में हिंदुत्व और राम जन्मभूमि आंदोलन को प्रमुखता से रखा। उन्होंने बालासाहेब ठाकरे की भूमिका को याद करते हुए कहा कि रामभक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों को जवाब देना होगा।
अपने संबोधन में उद्धव ठाकरे ने कहा कि हिंदू भोले हो सकते हैं, लेकिन मूर्ख नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में गड़बड़ी हुई है, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाब देना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका सवाल भगवान राम से नहीं, बल्कि मंदिर के दान और ट्रस्ट के प्रबंधन से जुड़ा है। इस दौरान उन्होंने नया नारा भी दिया— "जपावा हृदयात राम, मुखात जय श्रीराम"।
यह अभियान ऐसे समय शुरू किया गया है, जब हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद और कई नेता एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह राजनीतिक अभियान दल-बदल से ध्यान हटाकर बालासाहेब ठाकरे की वैचारिक विरासत और राम जन्मभूमि आंदोलन में शिवसेना की भूमिका को याद दिलाने का प्रयास है।
वहीं, देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें खुशी है कि उद्धव को भगवान राम की याद आ गई है। उन्होंने कहा कि यदि उद्धव रोज़ रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करेंगे और भगवान राम के मार्ग पर चलेंगे तो यह उनके लिए अच्छा होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह अभियान उद्धव ठाकरे के लिए हिंदुत्व समर्थक मतदाताओं को दोबारा जोड़ने के साथ-साथ INDIA गठबंधन में संतुलन बनाए रखने की बड़ी चुनौती भी साबित हो सकता है।