अयोध्या न्यूज डेस्क: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा कि अयोध्या राम मंदिर में दान राशि की कथित चोरी की घटना से श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंची है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस घटना के बहाने अयोध्या, राम जन्मभूमि और हिंदू आस्था को बदनाम करना उचित नहीं है।
एक मीडिया कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है और उसके कामकाज में सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं है। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद तुरंत कार्रवाई की गई। मामले में दान राशि की कथित चोरी के आरोप में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि उनकी मदद करने के आरोप में दो अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए ट्रस्ट के पूर्व महासचिव *चंपत राय* और ट्रस्टी *अनिल मिश्रा* ने अपने पद से इस्तीफा भी दिया है। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है, लेकिन इस घटना को आधार बनाकर अयोध्या और राम जन्मभूमि की छवि खराब करने का प्रयास सही नहीं है।
उन्होंने विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह आस्था से जुड़े मुद्दों का राजनीतिकरण कर रही है। योगी ने कहा कि श्रद्धा के विषयों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन का मामला जून के पहले सप्ताह में सामने आया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन किया। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को एफआईआर दर्ज की गई थी। अब तक दान गिनती प्रक्रिया से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।