अयोध्या न्यूज डेस्क: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को विपक्ष पर आस्था का दिखावा करने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान कभी हनुमानगढ़ी मंदिर में नमाज कराने की तैयारी की गई थी। उन्होंने यह बयान राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर विपक्ष के हमलों के बीच लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग कभी हनुमानगढ़ी में नमाज की व्यवस्था कराने की कोशिश करते थे, वही आज अयोध्या और आस्था पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोगों को धार्मिक स्थलों पर टिप्पणी करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। योगी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने अयोध्या को सनातन धर्म की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में स्थापित किया है, जबकि विपक्ष केवल आस्था की राजनीति करता है।
पूर्व डीजीपी और भाजपा नेता बृजलाल ने दावा किया कि वर्ष 2003 में हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज कराने का प्रस्ताव था, लेकिन तत्कालीन फैजाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के हस्तक्षेप के बाद कार्यक्रम मंदिर के महंत ज्ञानदास के आवास पर आयोजित किया गया। हालांकि, उस समय के तत्कालीन आईजी वी.एन. राय ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि यदि ऐसा आदेश था और उसका पालन नहीं हुआ, तो यह संभव ही नहीं है।
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले पर मुख्यमंत्री ने कहा कि घटना दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन इसकी जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रही है। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट के अनुरोध और एसआईटी की सिफारिशों के आधार पर कार्रवाई की जा रही है तथा नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए कुछ लोगों ने इस्तीफा भी दिया है।
उल्लेखनीय है कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की एसआईटी से जांच रिपोर्ट मांगी थी। साथ ही, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी करते हुए कथित चढ़ावा चोरी मामले की समयबद्ध जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की है। एक याचिकाकर्ता ने मामले की सीबीआई जांच और ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड का सीएजी ऑडिट कराने की भी मांग की है।