अयोध्या न्यूज डेस्क: अयोध्या जिले के मिल्कीपुर क्षेत्र में हुए दलित किशोरी के साथ दुष्कर्म के मामले में एक नया मोड़ आया है। पुलिस ने मुख्य आरोपी सहबान के डीएनए टेस्ट के लिए अदालत से अनुमति प्राप्त की है। यह कदम आरोपी की पहचान और अपराध की पुष्टि के लिए उठाया गया है। विवेचक श्रेयश त्रिपाठी ने विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रथम निरुपमा विक्रम की अदालत से सहबान के डीएनए टेस्ट के लिए सैंपल लेने की अनुमति प्राप्त की है, जिससे मामले की जांच और मजबूत होगी।
मिल्कीपुर क्षेत्र में दलित किशोरी के साथ दुष्कर्म के मामले में आरोपी सहबान 6 सितंबर से मंडल कारागार में बंद है। जबकि फरार चल रहे सह आरोपी मानू को 10 सितंबर को गिरफ्तार किया गया है। विवेचक ने मानू की न्यायिक रिमांड की मांग की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए मानू को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। इस मामले में अब तक दोनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं।
दलित किशोरी से दुष्कर्म के मामले में पीड़ित परिवार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी, जिसके बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए दूसरे आरोपी मानू को गिरफ्तार कर लिया था। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपी सहबान और मानू ने उसे बहाने से बुलाया और सहबान ने मानू के सामने दुष्कर्म किया। इसके बाद आरोपियों ने पीड़िता के परिजनों को धमकी दी और उन्हें बम से उड़ाने की धमकी दी। पीड़िता ने 5 सितंबर को पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की।
पीड़िता की शिकायत पर सहबान और मानू के खिलाफ दुष्कर्म और अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पीड़िता के 164 के बयान के लिए विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की अदालत में पेश किया गया, जहां मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज किया गया। विवेचना अधिकारी श्रेयश त्रिपाठी ने बताया कि आरोपी सहबान के डीएनए जांच के लिए सैंपल लेने की अनुमति मिल गई है, जिसे आज शाम जिला कारागार में लिया जाएगा। पीड़िता के डीएनए टेस्ट के लिए सैंपल पहले ही मेडिकल परीक्षण के दौरान ले लिया गया था।