अयोध्या न्यूज डेस्क: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में गुरुवार को एक अहम घटनाक्रम हुआ जब न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने समाजवादी पार्टी के नेता और अयोध्या सामूहिक दुष्कर्म मामले में आरोपी मोईद अहमद की जमानत याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। इस मामले को अब मुख्य न्यायाधीश के निर्देशानुसार नियमित पीठ के पास भेजा गया है, जहां अगले सप्ताह इस पर सुनवाई होगी।
इससे पहले, अदालत ने अहमद को निर्देश दिया था कि वह पीड़िता और शिकायतकर्ता की गवाही पूरी होने के बाद जमानत के लिए पुनः आवेदन कर सकते हैं। अब जब मुख्य गवाही दर्ज हो चुकी है, तो उनकी कानूनी टीम ने नई जमानत याचिका दायर कर दी है। याचिका में तर्क दिया गया है कि गवाही पूरी हो जाने के बाद आरोपियों को जमानत मिलने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए।
यह मामला 29 जुलाई को अयोध्या में हुए एक जघन्य अपराध से जुड़ा है। आरोप है कि मोईद अहमद और राजू खान ने 12 वर्षीय लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। यह घटना कथित तौर पर खान की बेकरी के पास हुई थी। बाद में प्रशासन ने उस बेकरी को ध्वस्त कर दिया था।
इस घटना ने राजनीतिक और कानूनी हलकों में गहरी चर्चा छेड़ दी है। अब अदालत से सभी की नजरें इस बात पर हैं कि नियमित पीठ इस जमानत याचिका पर क्या निर्णय लेती है। पीड़िता और उसके परिवार को न्याय दिलाने के सवाल पर भी चर्चा तेज हो गई है।