अयोध्या न्यूज डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को अयोध्या में भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि अयोध्या वह पवित्र जगह है, जहां आदर्श सिर्फ किताबों में नहीं रहते, बल्कि जीवन का हिस्सा बन जाते हैं। उन्होंने बताया कि यही वह नगरी है, जहां से भगवान राम ने अपना जीवनयात्रा शुरू की और अपने कर्मों से दुनिया को दिखाया कि समाज के सहारे और मूल्यों की ताकत से कैसे एक व्यक्ति ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ बनता है।
पीएम मोदी ने कहा कि जब भगवान राम ने अयोध्या छोड़ी थी, तब वह सिर्फ राजकुमार राम थे, लेकिन लौटे तो मर्यादा पुरुषोत्तम बनकर। उन्होंने बताया कि इस यात्रा में महर्षि वशिष्ठ की शिक्षा, महर्षि विश्वामित्र का मार्गदर्शन, महर्षि अगस्त्य की सीख, देवी अहल्या की कृपा, निषादराज गुह की दोस्ती और माता शबरी का प्यार—सबका बहुत बड़ा योगदान रहा।
उन्होंने आगे कहा कि आज अगर हमें ‘विकसित भारत’ बनाना है, तो हमें भी इसी तरह समाज की एकजुट ताकत की ज़रूरत होगी। उन्होंने यह भी बताया कि राम मंदिर का दिव्य परिसर अब भारत की सामूहिक क्षमता को जगाने का केंद्र बन रहा है, जो आने वाले समय में हमें और मज़बूती देगा।
सप्त मंदिर का ज़िक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यहां माता शबरी का मंदिर आदिवासी समाज की परंपरा और प्रेम का प्रतीक है, जबकि निषादराज मंदिर सच्ची दोस्ती की मिसाल है। साथ ही, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र और महर्षि अगस्त्य के मंदिर भी यहां बने हैं। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि अयोध्या आने पर सप्त मंदिर अवश्य देखें, क्योंकि यह हमारे विश्वास के साथ-साथ कर्तव्य, मैत्री और सामाजिक सद्भाव के मूल्यों को भी मज़बूत करते हैं।