अयोध्या न्यूज डेस्क: राम मंदिर के शिखर पर धर्मध्वजा फहराने के बाद बुधवार को अयोध्या में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। केसरिया आभा में नहाया राम मंदिर दिव्य चमक से जगमगा रहा था। सुबह की पहली किरण जैसे ही शिखर पर लहराते धर्मध्वज पर पड़ी, पूरा परिसर भक्तिरस से भर गया। ध्वजारोहण के बाद श्रद्धालुओं में रामलला के दर्शन की लालसा कई गुना बढ़ गई और बुधवार को लगभग दो लाख लोगों ने दर्शन किए।
दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने बताया कि रामलला का दिव्य रूप पहले से और भी अलौकिक दिखाई दिया। मंदिर में गूंजते जयघोष, शंखनाद और सुनहरी आभा ने भक्तों को भाव-विभोर कर दिया। प्रशासन ने भीड़ को संभालने के लिए विशेष इंतजाम किए और श्रद्धालुओं को छह कतारों में दर्शन कराए गए। मंदिर सुबह सात बजे खुलना था, लेकिन श्रद्धालुओं की भीड़ दर्शन पथ पर सुबह पांच बजे से ही जुट गई थी।
राम मंदिर के 191 फीट ऊंचे शिखर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को धर्मध्वजा फहराया। अब यह तय करने पर मंथन शुरू हो गया है कि ध्वज को साल में कितनी बार और कब बदला जाए। राम मंदिर में हर साल विजय दशमी पर ध्वज बदलने की परंपरा है, और तकनीकी टीम सुरक्षा, ऊंचाई, हवा की दिशा और वजन को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित प्रक्रिया तैयार कर रही है। वर्तमान ध्वज लगभग 40 किलो वज़न वाले विशेष धातु के दंड पर स्थापित है, जिसकी लंबाई 22 फीट और ऊंचाई 11 फीट है।
राम मंदिर ट्रस्ट के डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि 191 फीट ऊंचाई पर हवा का दबाव ज़मीन की तुलना में लगभग दोगुना होता है। इसलिए ध्वज बदलना सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि एक जटिल इंजीनियरिंग प्रक्रिया भी है। ट्रस्ट विशेषज्ञों की सलाह से ध्वज परिवर्तन को सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से करने की योजना बना रहा है। फिलहाल विचार चल रहा है कि ध्वज केवल विजय दशमी पर बदला जाए या रामनवमी और अन्य त्योहारों पर भी इसे बदलने की परंपरा शुरू की जाए।