अयोध्या न्यूज डेस्क: अयोध्या में रामलला के प्राकट्योत्सव की तैयारियां जोरों पर हैं। इस बार वासंतिक नवरात्र आठ दिनों का ही होगा, इसलिए 30 मार्च से कलश स्थापना के साथ श्रीमद वाल्मीकि रामायण, श्रीमद रामचरित मानस, अध्यात्म रामायण और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाएगा। हालांकि, नौ दिवसीय रामकथा का शुभारंभ पहले ही 29 मार्च से अंगद टीला परिसर में होगा। वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य अतुल कृष्ण भारद्वाज प्रतिदिन शाम 4 से 7 बजे तक रामकथा का रसपान कराएंगे। वहीं, प्राकट्य दिवस पर रामलला को भव्य फूल बंगले में विराजित किया जाएगा।
महासचिव चंपतराय के अनुसार, उत्सव का अर्थ नृत्य और संगीत से है, इसलिए आयोजन में कथक और कुचीपुड़ी जैसे शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके अलावा, देशभर के जाने-माने संगीतज्ञ अपनी सुर साधना के माध्यम से भगवान राम को राग सेवा अर्पित करेंगे। स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों को इस भव्य कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है, जिसकी तैयारियां पहले से ही शुरू हो चुकी हैं।
उन्होंने बताया कि प्राचीन काल में बिजली और आधुनिक साधनों की अनुपस्थिति में संतों ने भगवान के लिए फूल बंगले की परंपरा विकसित की थी, ताकि उन्हें शीतलता मिले। यह परंपरा आज भी जारी है, लेकिन इस बार गर्मी और तीव्र धूप के कारण फूलों के प्रवेश द्वार नहीं बनाए जाएंगे। उनकी जगह रंग-बिरंगे कपड़ों से सुंदर और आकर्षक प्रवेश द्वार तैयार किए जाएंगे, जिससे वातावरण को और भव्य बनाया जा सके।