अयोध्या न्यूज डेस्क: रामनगरी अयोध्या में नजूल (सरकारी) जमीन की अवैध खरीद-फरोख्त का एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहाँ एक कथित प्रॉपर्टी डीलर ने करीब 20 परिवारों को अपना शिकार बनाकर करोड़ों की चपत लगा दी। आरोपी ताज मोहम्मद ने इस सरकारी भूमि को अपनी पुश्तैनी जायदाद बताकर लोगों को झांसे में लिया और करीब दो करोड़ रुपये ऐंठ लिए। पीड़ित परिवारों ने न केवल जमीन के लिए भारी रकम चुकाई, बल्कि मकान बनाने में भी अपनी जमा-पूंजी लगा दी, लेकिन उनके सपने तब चकनाचूर हो गए जब प्रशासन का बुलडोजर उनके सपनों के आशियानों पर चल पड़ा।
मामला तब प्रकाश में आया जब पीड़ित परिवारों ने निर्माण कार्य शुरू किया, और अचानक पुलिस बल के साथ नजूल विभाग की टीम बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंच गई। कैंट थाना क्षेत्र के 14 कोसी परिक्रमा मार्ग पर स्थित पराग डेयरी के पीछे की इस कार्रवाई से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। कई पीड़ित महिलाएं और पुरुष रोते-बिलखते बुलडोजर के सामने लेट गए और गुहार लगाई, लेकिन अंततः पुलिस की मदद से उन्हें हटाया गया और निर्माण कार्य पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई।
पीड़ितों का दर्द है कि उन्होंने प्रॉपर्टी डीलर के दावों पर भरोसा कर अपनी मेहनत की कमाई लगा दी। आरोपी ताज मोहम्मद ने न केवल जमीन के फर्जी दस्तावेज दिखाए थे, बल्कि यह भरोसा भी दिलाया था कि यह जमीन विवादमुक्त है और निर्माण में कोई समस्या नहीं आएगी। अधिकांश पीड़ितों ने अयोध्या के ही निवासी होने के नाते 500-500 वर्गफुट के प्लॉट खरीदे थे। अब सरकारी जमीन होने का खुलासा होने के बाद उनके सामने बेघर होने का संकट खड़ा हो गया है और वे प्रशासन से मदद व दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की गुहार लगा रहे हैं।
प्रशासन ने इस प्रकरण को बेहद गंभीरता से लेते हुए एसडीएम वित्त एवं राजस्व को उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। पीड़ितों को अपने दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है और जांच पूरी होने तक निर्माण कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इधर, ठगी करने वाला आरोपी ताज मोहम्मद फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस छापेमारी कर रही है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि मामले की गहन जांच के बाद दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।