अयोध्या न्यूज डेस्क: अयोध्या में रामलला के मुख्य मंदिर के साथ-साथ परिसर में स्थित सात पूरक मंदिरों में श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू होने के बाद, श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अर्चकों (पुजारियों) की नियुक्ति प्रक्रिया तेज कर दी है। 13 अप्रैल से पूरक मंदिरों के कपाट खुलने के कारण अब परिसर में सेवा-पूजा के लिए अतिरिक्त श्रमशक्ति की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
अर्चकों की वर्तमान स्थिति और आवश्यकता:
वर्तमान में राम मंदिर परिसर में कुल 20 नियमित अर्चक नियुक्त हैं, जिनमें से चार वरिष्ठ पुजारी मंदिर निर्माण से पहले से ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं। रामलला और राम परिवार की दो पालियों में पूजा के साथ-साथ अब परकोटे के 6 मंदिरों, शेषावतार मंदिर और कुबेर टीले पर स्थित कुबेरेश्वर महादेव की सेवा के लिए कम से कम 48 पुजारियों की जरूरत है। ट्रस्ट फिलहाल इन्हीं 20 पुजारियों के माध्यम से व्यवस्था संभाल रहा है, जिसमें 10 पुजारी मुख्य मंदिर और शेष 10 पूरक मंदिरों का दायित्व निभा रहे हैं।
नियुक्ति प्रक्रिया और चयन:
ट्रस्ट ने इस कमी को पूरा करने के लिए रामनिवास और अयोध्या के अन्य मंदिरों में सेवारत अनुभवी अर्चकों को प्राथमिकता देना शुरू किया है। इनमें से कई अर्चक पहले भी परिसर के विभिन्न अनुष्ठानों में सहायता देते रहे हैं, इसलिए उन्हें लंबे प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, मंदिर व्यवस्थापक गोपाल राव के अनुसार, नियुक्त किए जाने वाले पुजारियों को सेवा के साथ-साथ विशिष्ट पद्धति का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
पिछली प्रक्रिया से मिली सीख:
बीते वर्ष ट्रस्ट ने आवेदन और साक्षात्कार के माध्यम से भर्ती की कोशिश की थी, लेकिन वह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी। उससे पूर्व, 20 पुजारियों को 6 माह का विशेष प्रशिक्षण देकर नियुक्त किया गया था। अब पूरक मंदिरों में नियमित दर्शन शुरू होने के बाद, ट्रस्ट जल्द ही नए अर्चकों की कुल संख्या निर्धारित कर उन्हें औपचारिक रूप से जिम्मेदारी सौंपेगा, ताकि परिसर के सभी देवस्थानों पर पूजन-अर्चन निर्बाध रूप से चलता रहे।