अयोध्या न्यूज डेस्क: अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण कार्य 2025 के अंत तक पूरा होने की संभावना है। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने माना है कि मूल मंदिर का सुपर स्ट्रक्चर तय समय पर बनकर तैयार हो गया है, लेकिन बाकी निर्माण कार्य में देरी हो रही है। इसका मुख्य कारण श्रमिकों की कमी और प्राकृतिक बाधाएं हैं, जिन पर निर्माण एजेंसियों का नियंत्रण नहीं है। अब निर्माण कार्य पूरा करने की समयसीमा दिसंबर 2025 तक बढ़ा दी गई है।
तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने बताया कि पहले जहां एक साथ चार हजार श्रमिक काम कर रहे थे, अब यह संख्या घटकर दो हजार रह गई है। उन्होंने कहा कि 2025 के अंत तक राम दरबार और परिसर के 18 मंदिर बनकर तैयार हो जाएंगे। इनमें सूर्य देव, भगवती, भगवान शंकर, गणपति, हनुमान जी और माता अन्नपूर्णा के मंदिर शामिल होंगे। साथ ही, लक्ष्मण, महर्षि वाल्मीकि, माता शबरी और गोस्वामी तुलसीदास जी के मंदिर भी परिसर का हिस्सा होंगे।
मंदिर परिसर में चार प्रवेश द्वार, ऑडिटोरियम, विश्राम गृह और ट्रस्ट का कार्यालय बनाया जा रहा है। महासचिव के अनुसार, इन परियोजनाओं का 60-70% काम पूरा हो चुका है। रामकथा संग्रहालय का पुनर्निर्माण कार्य भी शुरू हो गया है और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्वरूप देने का लक्ष्य है। यह संग्रहालय अगले एक साल में बनकर तैयार हो जाएगा।
सुरक्षा मानकों के मामले में राम मंदिर को उच्चतम श्रेणी में रखा गया है। ब्रिटेन की एक सुरक्षा टीम ने अयोध्या का दौरा कर मंदिर को पांच सितारा श्रेणी में स्थान दिया। टीम ने इसे सुरक्षा के सर्वश्रेष्ठ मानकों वाला परिसर बताया। महासचिव ने कहा कि 2020 में निर्माण कार्य शुरू होने के बाद से अब तक कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हुई है, जो इस परियोजना की गुणवत्ता को दर्शाता है।
मंदिर निर्माण के साथ-साथ तीर्थ क्षेत्र में और भी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से अयोध्या को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिलेगी। तीर्थ क्षेत्र का यह प्रयास श्रद्धालुओं के लिए एक अद्वितीय अनुभव और ऐतिहासिक धरोहर के रूप में पेश किया जाएगा।