अयोध्या न्यूज डेस्क: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी चुनावी हार को स्वीकार करने से स्पष्ट इनकार करते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा न देने का साहसिक फैसला लिया है। उनके इस रुख को समाजवादी पार्टी का कड़ा समर्थन मिला है। अयोध्या से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने ममता बनर्जी के समर्थन में आते हुए केंद्र सरकार और निर्वाचन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिससे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने पश्चिम बंगाल के नतीजों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ममता बनर्जी चुनाव हारी नहीं हैं, बल्कि उन्हें साजिश के तहत हराया गया है। उन्होंने चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए इसे 'लोकतंत्र पर डकैती' करार दिया। अवधेश प्रसाद ने उत्तर प्रदेश के मिल्कीपुर उपचुनाव का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि जिस तरह वहां सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर बूथ लूटे गए, वही कहानी पश्चिम बंगाल में भी दोहराई गई है। उन्होंने दावा किया कि बाहरी लोगों और भारी सुरक्षा बलों के जरिए फर्जी मतदान कराकर जनादेश को बदला गया है।
विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार ने चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर मतदाताओं को डराने का काम किया है। अवधेश प्रसाद ने देश की वर्तमान स्थिति की तुलना आपातकाल के दौर से करते हुए कहा कि आज फिर से जयप्रकाश नारायण जैसे बड़े आंदोलन की जरूरत है ताकि संविधान को बचाया जा सके। उन्होंने ममता बनर्जी को सांत्वना देते हुए कहा कि 'इंडी' गठबंधन उनके साथ मजबूती से खड़ा है। उनके अनुसार, गठबंधन का मुख्य उद्देश्य देश में लोकतंत्र की बहाली और युवाओं को रोजगार दिलाना है, जिसे पूरा करने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों ने पश्चिम बंगाल में शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल दिया है। राज्य की 293 सीटों में से भारतीय जनता पार्टी ने 206 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज कर बहुमत हासिल कर लिया है। वहीं, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी पहली बार 100 के आंकड़े से नीचे गिरकर महज 80 सीटों पर सिमट गई है। कांग्रेस और अन्य छोटे दलों का प्रदर्शन भी बेहद निराशाजनक रहा है। इन नतीजों के बावजूद ममता बनर्जी का पद न छोड़ने का ऐलान बंगाल की राजनीति को एक अनिश्चित मोड़ पर ले आया है।